Friday, July 7, 2017

बकवास वर्ग के अत्याचारों के विरुद्ध मोस्ट वंचित वर्ग की रणनीति?

बकवास वर्ग के अत्याचारों के विरुद्ध मोस्ट वंचित वर्ग की रणनीति?

हम वंचितों को सबसे पहले बिना किसी पूर्वाग्रह के कुछ महत्वपूर्ण बातें ठीक से समझनी होंगी। जैसे—
1. आजादी के बाद से पहली बार वर्चस्ववादी अगड़ी जातियों अर्थात बकवास वर्ग की तानाशाही और मनमानियां सारे देश में बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। जिसके कारण भारत के बहुसंख्यक पिछड़े और वंचित वर्गों (अर्थात MOST) की जातियों के मान-सम्मान और हकों को लगातार कुचला जा रहा है। इस प्रकार मोस्ट जातियों को भयभीत और आतंकित करके ऐसी स्थिति में पहुंचाया जा रहा है जिससे कि वे बकवास वर्ग के खिलाफ *सिर उठाने की हिम्मत ही तक नहीं कर सकें।*

2. मोस्ट वर्गों को आतंकित करने के साथ ही साथ बकवास वर्ग द्वारा मुस्लिमों को आतंकी, आदिवासियों को नक्सली, ईश्वर में आस्था रखने वाले भोले लोगों को हिंदुत्व रक्षक, दलितों को उद्दंड एवं असामाजिक और सुशिक्षित महिलाओं को चरित्रहीन घोषित करके आपस में एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने, भड़काने और लड़ाने की नीति को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। दूसरी ओर देश की व्यवस्था पर काबिज बकवास वर्ग के लोगों को राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, संस्कृति और भारतीय आदर्शों का सर्वश्रेठ संरक्षक घोषित करना भी इनके षड़यंत्र का मूल मकसद है।

3. साधू-सन्तों का चोला ओढ़कर बकवास वर्ग के लोग मंदिरों को छोड़कर संसद और विधानमण्डलों तथा उद्योग धंधों पर कब्जा जमा रहे हैं। जबकि मोस्ट वर्ग के लोग अपने पैतिृक कलात्मक व्यवसायों तक को छोड़कर नर्क के भय और वैकुण्ठ की आकांक्षा में मंदिर बनाने, मंदिर में प्रवेश पाने और बामणों द्वारा घोषित भगवानों की पूजा अर्चना करने में अपनी ऊर्जा, आर्थिक संसाधनों तथा अमूल्य जीवन का अपव्यय करके आने वाली पीढियों को भी अंधश्रृद्धा, अंधविश्वास तथा पाखण्ड के अंधकूप में धकेल रहे हैं।

4. जबकि समझने वाली मूल बात यह है कि अंततः बकवास वर्ग द्वारा राजनीतिक सत्ता हासिल करके परोक्ष रूप से न्यायिक व्याख्या और प्रशासनिक आदेशों के मार्फत संविधान तथा आरक्षण व्यवस्था को तहस-नहस किया जा रहा है। इस छद्म एजेंडा को समझना बेहत जरूरी है। सरकारी खजाने से विज्ञापन रूपी रिश्वत अदा करके मीडिया को अपने कब्जे में किया हुआ है और बिकाऊ-भांड मीडिया के मार्फत देश और दुनिया को लगातार गुमराह किया जा रहा है।

5. उपरोक्त हालातों के साथ-साथ सबसे दु:खद स्थिति तो यह है कि वंचित मोस्ट वर्ग के कुछ चतुर, चालाक, स्वार्थी, भ्रष्ट, धूर्त तथा वर्गद्रोही प्रकृति के समाज सेवकों, राजनेताओं एवं पूर्व नौकरशाहों को बकवासवर्गीय राजनीतिक दलों द्वारा अपने जाल में फंसाया हुआ है। जिन्हें अपनी पार्टी में दिखावटी हैसियत प्रदान करके और, या सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों या वंचित वर्ग बहुल जातियों के क्षेत्रों से सांसद-विधायक बना दिया जाता है।
पद और धन के लोभी इन लोगों के द्वारा मोस्ट मतदाताओं का ब्रेनवाश करके, बकवास वर्ग के पक्ष में आम लोगों को लगातार गुमराह किया जाता रहता है। वंचित मोस्ट वर्ग के आम और भोले-भाले लोग सत्ता और राजनीति की कूटनीतिक चालों तथा षड्यंत्रों के पीछे छिपे छद्म ऐजेंडे की हकीकत को जाने बिना इनके जाल में फंसते चले जाते हैं।

6. दूसरी दु:ख स्थिति यह है कि उपरोक्त सब बातों को जानते और समझते हुए भी वंचित मोस्ट वर्ग का मध्यम वर्ग चुपचाप तामाशा देखते रहने को विवश होता है। जिनमें अधिकत संख्या चतुर्थ, तृतीय एवं द्वितीय श्रेणी के लोक सेवकों तथा व्यवसाईयों और विकासमान परिवार के लोगों की होती है। इन्हीं लोगों की पदोन्नतियों, संवैधानिक हकों और सामाजिक न्याय में सहायक सुविधाओं को छीनकर, सीधे तौर पर इनको और इनके परिवारों के बच्चों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मिल रहे आरक्षण से महरूम किया जा रहा है। जिसके लिये न्यायपालिका का सहयोग लिया जा रहा है। 1950 में दोराईराजन से लेकर नीट मामले तक न्यायपालिका ने आरक्षण की संकीण व्याख्या करके, आरक्षण को लगातार कमजोर किया है।

7. वर्तमान में जबकि हमारे राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधि पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं। प्रतिपक्ष की बोलती भी बंद है और बकवास वर्ग की मनमानी हर दिन बढती जा रही हैं। ऐसे में मोस्ट वर्ग को अपना अस्तित्व बचाना है कि खुद ही आगे आना होगा। जिसके लिये जनान्दोलन बहुत जरूरी है, लेकिन जनान्दोलन की दिशा में आगे बढाने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझना अत्यन्त जरूरी है। जैसे—

1)~~~~ यदि बहुसंख्यक मोस्ट वर्ग के लोक सेवक सीधे तौर पर सरकार की उत्पीड़क, विभेदक और मनमानी नीतियों का विरोध करते हैं तो उनकी नौकरी दाव पर लग सकती है।
2)~~~~ यदि बहुसंख्यक मोस्ट वर्ग के युवा सीधे तौर पर सरकार की उत्पीड़क, विभेदक और मनमानी नीतियों का विरोध करते हैं तो उनको सरकारी नौकरी मिलना तो दूर, उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करके उनके सम्पूर्ण कैरियर को ही दाव पर लगाये जाने की आशंका बनी रहेगी।
3)~~~~ उपरोक्त हालातों में वर्तमान लोक सेवक और लोक सेवक बनने की आकांक्षा रखने वाले हमारे महत्वपूर्ण लोगों को हम जनान्दोलन के लिये दाव पर लगाने की मूर्खता नहीं कर सकते हैं। लेकिन वर्तमान चिन्ताजनक हालातों में जनान्दोलन की जरूरत को नकारा भी नहीं जा सकता।
4)~~~~ इसलिये हमें वंचित मोस्ट वर्ग के आम परिपक्व लोगों और स्वस्थ सेवानिवृत लोगों को मोस्ट जनान्दोलन की नीति, नियम और रणनीति का मूल आधार बनाना होगा।
5)~~~~ प्रस्तावित जनान्दोलन का सम्पूर्ण आर्थिक भार लोक सेवकों, व्यापारियों, व्यवसाईयों और सम्पन्न लोगों को वहन करना होगा।
6)~~~~ यदि हम उपरोक्तानुसार जनान्दोलन को जरूरी समझते हैं तो हमें सबसे पहले शुरूआत जनजागरण से करनी होगी। जिसके लिये हमें वक्ताओं को तैयार करना होगा।
7)~~~~ योग्य और प्रशिक्षित वक्ताओं द्वारा लगातार गांव-गांव, शहर-शहर, हर माह 10-20 कार्यशाला और सभाओं के आयोजन करके आम लोगों को वर्तमान हालातों से अवगत करवाना होगा।

उपरोक्त सातों चरणों से गुजरने के बाद जनजागरण अभियान को जनान्दोलन में बदलना होगा। जिसकी रणनीति तत्कालीन हालातों के अनुसार बनायी जा सकेगी।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राष्ट्रीय प्रमुख
हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन
9875066111/07.07.2017

No comments:

Post a Comment