Saturday, July 22, 2017

जन्मजातीय विभेद से पीड़ित भारतीय समाज में मूलनिवासी और विदेशी के जरिये वंचित वर्गों की एकता को छिन्नभिन्न करने वाला मूलवंश या नस्लीय विभेद का काल्पनिक आन्दोलन क्यों?—डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

*जन्मजातीय विभेद से पीड़ित भारतीय समाज में मूलनिवासी और विदेशी के जरिये वंचित वर्गों की एकता को छिन्नभिन्न करने वाला मूलवंश या नस्लीय विभेद का काल्पनिक आन्दोलन क्यों?—डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'*
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मैं एक गरीब और संघर्ष झेलने को विवश आदिवासी मीणा परिवार में जन्मने के बाद 1978—1979 से सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ हूं। 4 साल 2 माह 26 दिन 4 जेलों में रहा। 20 साल 9 माह 5 दिन तक 3 रेलवेज में रेलवे सेवा की और पत्रकारिता तथा लेखन क्षेत्र से जुड़ा रहा हूं। लम्बे समय तक रेलवे में कर्मचारी प्रतिनिधि भी रहा। 22 राज्यों में सेवारत भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान बास का 1993 से राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं। इसके अलावा भी दैनिक जीवन में अनेकानेक प्रकार के लोगों से वास्ता पड़ता रहा है।

*इस दौरान मुझे व्यक्तिगत तौर पर तथा अपने नजदीकियों, सहयोगियों, मित्रों आदि के मामलों में जातिगत और वर्गगत आधार पर तो सैकड़ों बार कुटिल विभेद, तिरस्कार, शोषण, अधिकार हनन, अपमान जैसे वाकयों से दो-चार होना पड़ा। मगर मुझे कभी भी मूलवंश या नस्ल के आधार पर किसी अप्रिय या अपमानजनक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा! यही कारण है कि भारत में 90 फीसदी से अधिक लोग विदेशी मूल के होने के बावजूद भी किसी प्रकार का कोई नस्लीय विभेद देखने को नहीं मिलता है। परिणामत: भारत में नस्ल और मूलवंश के आधार पर विभेद के आपराधिक मामले लगभग शून्य हैं।*

इसके बावजूद जन्म आधारित जातिगत विभेद को दरकिनार करके विदेशी मूल के आर्यवंशी शूद्रों *(कृपया इस तथ्य की पुष्टि हेतु नीचे दिये गये नोट को भी पढें)* के वर्तमान वंशजों के नेतृत्व में *मूलनिवासी* और विदेशी जैसी शब्दावली के जरिये भारत को विभाजित करके लोगों में *वैमनस्यता पैदा करने तथा वंचित वर्गों की एकता को छिन्नभिन्न करने वाला अभियान संचालित करने का औचित्य क्या है?* 
*नोट:*
*एक महत्वूपर्ण तथ्य* डॉ. अम्बेड़कर *'शूद्र कौन थे'* पुस्तक में शोधपूर्ण सत्य लेखन के जरिये प्रमाणित कर चुके हैं कि—
*शूरवीर सूर्यवंशी आर्य क्षत्रियों द्वारा* लगातार ब्राह्मणों पर अत्याचार किये जाने के कारण, *ब्राह्मणों ने सूर्यवंशी आर्य क्षत्रियों का उपनयन संस्कार प्रतिबन्धित करके* उन्हें क्षत्रिण वर्ण से नये चौथे शूद्र वर्ण में डाल दिया। इस प्रकार *शूद्र आर्यवंशी सवर्ण हैं।*

*दूसरा महत्वूपर्ण तथ्य* डॉ. अम्बेड़कर *'अछूत कौन हैं...'* पुस्तक में शोधपूर्ण सत्य लेखन के जरिये प्रमाणित कर चुके हैं कि—

अछूत घोषित जातियों की अग्रेजों द्वारा विभिन्न समयों पर अनेक सूचियां जारी की गयी। जिनकी *कुल संख्या 429 बतायी गयी। जिनमें से 427 को डॉ. अम्बेड़कर ने गैर शूद्र अछूत जाति माना है।*

तदनुसार वर्तमान में *अजा वर्ग में शामिल सभी जातियां आर्यवंशी सवर्ण शूद्र नहीं हैं।*

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', राष्ट्रीय प्रमख-हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन, 9875066111, 22.07.2017
https://www.facebook.com/NirankushWriter/posts/456401324719637

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