Wednesday, July 19, 2017

मोस्ट वर्ग की एकता हेतु संयुक्त विचारधारा और संयुक्त नेतृत्व सबसे पहली जरूरत!

मोस्ट वर्ग की एकता हेतु संयुक्त विचारधारा और संयुक्त नेतृत्व सबसे पहली जरूरत!

आजादी के बाद से भारत में सामाजिक न्याय का मिशन अजा वर्ग के लोगों के नेतृत्व में संचालित होता रहा है। जिसमें आदिवासियों का सहयोगी के रूप में सक्रिय योगदान रहा है। लेकिन अजा वर्ग ने संयुक्त संगठनों में आदिवासी को कभी भी नेतृत्व नहीं करने दिया। इस कारण आपसी रिश्तों में अभी तक मजबूती का अभाव है। लेकिन पिछले 70 साल से जारी विचारधारा और नेतृत्व पूरी तरह से असफल, अनुदार और नाकारा सिद्ध हो चुके हैं। अत: वर्तमान हालातों में वंचित मोस्ट वर्ग को यदि एक होकर सामाजिक न्याय के मिशन को आगे बढाना ना है तो-

1. मोस्ट वर्ग की एकता के लिये संयुक्त विचारधारा और संयुक्त नेतृत्व को सबसे पहली जरूरत और अनिवार्यता मानकर आगे बढना होगा।

2. अभी तक अजा वर्ग के नेतृत्व द्वारा सामाजिक न्याय हेतु जारी रखी गयी, लेकिन असफल सिद्ध हो चुकी विचारधारा का मोस्ट वर्ग के विद्वानों की संयुक्त टीम द्वारा परीक्षण तथा पुनरावलोकन करना। जिससे कि मोस्ट वर्ग की एकता में बाधक तत्वों को चिह्नित करके निरसित/रिपील अर्थात डिलीट किया जा सके। साफ शब्दों में ओबीसी, मायनोरिटी और आदिवासी वर्गों को अस्वीकार्य विचारों तथा धारणाओं को हर हासल में त्यागना ही होगा।

3. सामाजिक न्याय के मिशन को भटकाने वाले अजा वर्ग के अग्रणी नेतृत्व को अपनी 70 साल से जारी गलतियों तथा असफलताओं को खुले मन से और सार्वजनिक रूप से स्वीकार करके ओबीसी, मायनोरिटी और आदिवासी नेतृत्व के सहयोगी के रूप में काम करना होगा।

उपरोक्त विचारों में सुधार, परिवर्तन, संशोधन सुझाने वाले पूर्वाग्रह से मुक्त विद्वान विश्लेष्कों के विचारों का स्वागत है।

जय भारत! जय संविधान!
नर-नारी, सब एक समान!

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राष्ट्रीय प्रमुख
हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन
W & M No. 9875066111, 19072017

No comments:

Post a Comment