Tuesday, June 27, 2017

संविधान की व्याख्या के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश गुलामी की गाथा लिखने वाले श्लोक सिद्ध होंगे।


*संविधान की व्याख्या के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश गुलामी की गाथा लिखने वाले श्लोक सिद्ध होंगे।*

अजा और अजजा के सांसदों की चुप्पी तथा सांसदों की चुप्पी पर हम अजा एवं अजजा के आम लोगों की चुप्पी का दुष्परिणाम है, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कि----

*"आरक्षित वर्ग के आवेदक द्वारा यदि आवेदन करते समय किसी भी प्रकार की छूट प्राप्त की गयी तो ऐसे आवेदक को अनारक्षित मैरिट में शामिल नहीं किया जाएगा।"*

इस फैसले का सीधा और साफ़ मतलब यही है कि *सुप्रीम कोर्ट ने संविधान को धता बतलाते हुए, संविधान की व्याख्या के नाम पर, भारत की व्यवस्था पर काबिज वर्चस्ववादी शोषक और संख्यात्मक दृष्टि से अल्पसंख्यक अगड़ी जातियों के अनारक्षित वर्ग के आवेदकों के लिए 50.5% आरक्षण घोषित कर दिया है। सबसे दु:खद यह कि यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों (जिनमें न्याय नहीं, अन्याय लक्षित है) की खिलाफत करो तो जस्टिस कर्णन की भांति न्यायिक अवमानना के अपराध में 6 माह के लिए जेल जाओ।*

अब ऐसे हालातों में विकल्प सीमित हैं- *वंचित वर्ग के लोगों के लिये, करो या मरो की स्थिति है*, लेकिन अजा तथा अजजा वर्ग का एलीट वर्ग जब तक साथ नहीं देगा, इस लड़ाई को जीतना आसान नहीं होगा। हो सकता है कि एलीट वर्ग भी सामने आ जाए, लेकिन बदले में उसे राजनीतिक सत्ता चाहिये होगी। *अनुभव यही सिद्ध करता है कि अजा एवं अजजा के एलीट वर्ग का राजनीतिक चरित्र भी वर्चस्ववादी अगड़ी जातियों की ही तरह असंवेदनशील, अनुत्तरदायी और अलोकतांत्रिक है।*

अतः अब हम को आम लोगों में से ही नेतृत्व उभारना होगा। इसके अलावा जो भी जरूरी हो करना होगा। अन्यथा *संविधान की व्याख्या के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश गुलामी की गाथा लिखने वाले श्लोक सिद्ध होंगे।* मुझे उम्मीद है, *हम में से कुछ लोगों की संवेदनाएं जागेंगी और हम अतिवाद, कट्टरता तथा अंधभक्ति से मुक्त होकर वंचित वर्ग की संयुक्त विचारधारा और संयुक्त नेतृत्व को जन्म देने की दिशा में कदम उठाएंगे।*

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
9875066111, 27.06.17

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